विहान

बाल-कहानियों व कविताओं का पिटारा

बुधवार, 12 जून 2013

पेड किसका है ?

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यह कहानी वैसे तो चकमक, मिट्टी की बात ( कहानी संग्रह एकलव्य) तथा बाल भास्कर में आ चुकी है लेकिन आपके पढे बिना बात अधूरी है । इसलिये इसे यहाँ...
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बुधवार, 5 जून 2013

नदिया कहती है ।

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नदिया बहती है । सबसे कहती है । गति ही तो जीवन है । गति ही अन्वेषण है । तुम चलते रहो ,डरो ना मन में सन्देह भरो ना   जो पानी सा बहता है...
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गुरुवार, 30 मई 2013

सूरज सर

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सूरज सर के गरम मिज़ाज जब देखो रहते नाराज   क्यों  रहते हैं  तेवर तीखे ? क्यों इतने रूखे अन्दाज ? देते कितने कठिन सवाल चलते अन्धड और ब...
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सोमवार, 20 मई 2013

वह कौन था ?

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एक संस्मरण यह बात  उस समय की है जब मैंने दूसरी कक्षा ही पास की थी । आगे पढ़ाने के लिये काकाजी मुझे अपने साथ बड़बारी ले गए थे जहाँ दो साल...
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मंगलवार, 7 मई 2013

क्यों लगती है प्यास ?

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गर्मी रानी ,क्यों लगती है , तुमको इतनी प्यास । पी जाती हो गटक् गटागट,  दिन भर कई गिलास । मटके रीते ,रीत चले हैं , कूप ,नदी और ताल । ...
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शुक्रवार, 26 अप्रैल 2013

मुझे धूप चाहिये

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यह शीर्षक कहानी का है और कहानी संग्रह का भी जो अभी -अभी एकलव्य ( भोपाल) से प्रकाशित हुआ है । इस संग्रह में आठ कहानियाँ है । आप कहानी को पढ...
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मंगलवार, 16 अप्रैल 2013

दे दो बॅाल हमारी

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बॅाल हमारी दे दो अम्मा । बात हमारी सुनलो अम्मा। आँगन में, या  छत पर होगी । अबकी बार और दे दोगी , फिर हम कभी नहीं आएंगे । कसम हमारी ...
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मेरे बारे में

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गिरिजा कुलश्रेष्ठ
जीवन के छह दशक पार करने के बाद भी खुद को पहली कक्षा में पाती हूँ ।अनुभूतियों को आज तक सही अभिव्यक्ति न मिल पाने की व्यग्रता है । दिमाग की बजाय दिल से सोचने व करने की आदत के कारण प्रायः हाशिये पर ही रहती आई हूँ ।फिर भी अपनी सार्थकता की तलाश जारी है ।
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