विहान
बाल-कहानियों व कविताओं का पिटारा
सोमवार, 19 अगस्त 2013
धरती गमक उठी है ।
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पडी फुहारें वन आँगन में , भीगी धरती गमक उठी है । धूमिल काले कलश उठाये, मेघराज पानी भर लाये । उमड--गरज कर खाली कर गये, बीजुरिया ,लो ...
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बुधवार, 14 अगस्त 2013
हमारा तिरंगा
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हमें जान से भी है प्यारा तिरंगा, अनौखा निराला है न्यारा तिरंगा । ये लहराए, पहली किरण मुस्कराए सिन्दूरी प्रभा से गगन जगमगाए। उदय होते र...
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सोमवार, 15 जुलाई 2013
वर्षा का स्कूल
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आसमान में शुरु होगया, वर्षा का स्कूल। सूरज की जो बजी 'बेल,' सुन दौडे रेलमपेल। नन्हे -नन्हे बादल , लादे भारी बस्ता , और पानी...
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बुधवार, 12 जून 2013
पेड किसका है ?
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यह कहानी वैसे तो चकमक, मिट्टी की बात ( कहानी संग्रह एकलव्य) तथा बाल भास्कर में आ चुकी है लेकिन आपके पढे बिना बात अधूरी है । इसलिये इसे यहाँ...
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बुधवार, 5 जून 2013
नदिया कहती है ।
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नदिया बहती है । सबसे कहती है । गति ही तो जीवन है । गति ही अन्वेषण है । तुम चलते रहो ,डरो ना मन में सन्देह भरो ना जो पानी सा बहता है...
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गुरुवार, 30 मई 2013
सूरज सर
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सूरज सर के गरम मिज़ाज जब देखो रहते नाराज क्यों रहते हैं तेवर तीखे ? क्यों इतने रूखे अन्दाज ? देते कितने कठिन सवाल चलते अन्धड और ब...
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सोमवार, 20 मई 2013
वह कौन था ?
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एक संस्मरण यह बात उस समय की है जब मैंने दूसरी कक्षा ही पास की थी । आगे पढ़ाने के लिये काकाजी मुझे अपने साथ बड़बारी ले गए थे जहाँ दो साल...
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