विहान
बाल-कहानियों व कविताओं का पिटारा
शनिवार, 29 अक्टूबर 2016
जगमग दीप जले
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गिरी अँधेरे की दीवारें , जगमग दीप जले . झिलमिल झिलमिल सजी कतारें जगमग दीप जले . गया दशहरा जैसे ही , तन मन आई दीवाली . द्वा...
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मंगलवार, 27 सितंबर 2016
मुझको तो गाना है .
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था एक अँधेरा कमरा कमरे में थी अलमारी . अलमारी में रक्खे थे , कुछ डिब्बी-डिब्बे भारी . डिब्बी डिब्बों के पीछे . बैठा था आँखें ...
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रविवार, 14 अगस्त 2016
मेरे देश
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मेरे देश अजेय अटल मन में हो यह विश्वास . पाँव तले हर मुश्किल हो और बाँहों में आकाश । मेरा तन मन धन अर्पित है तू है मेरा मान . ...
सोमवार, 30 मई 2016
नींद चिरैया
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पल में फुदक-फुदक उड़ जाती, 'छुटकू जी की नींद चिरैया । पलकों के आँगन में जैसे - तैसे तो वह आती है हुई जरा सी भी आहट तो ...
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शुक्रवार, 8 अप्रैल 2016
ये चित्रकारी....
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, आँगन ,छत ,फर्श और रंग गईं दीवार है देखो बताओ ये कौन चित्रकार है ? दे देते हाथी को घोड़े की सूरत . चार पाँव चिड़िया के इनकी जरु...
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मंगलवार, 29 दिसंबर 2015
चिड़िया जैसे दिन
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दादाजी की पगडी जैसी लम्बी रातें हैं । मुन्नू जी के चुनमुन चड्डी , झबलों जैसे दिन । लम्बी और उबाऊ , जटिल सवालों सी रातें उछ...
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रविवार, 30 अगस्त 2015
बिन्नी की जीत .
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सात साल की बिन्नी अपने भाई-बहिनों में सबसे बड़ी थी और पढ़ने में सबसे होशियार भी पर खेलने में भी उसका कोई मुकाबला नही था .उसे बगीचे में कचन...
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