विहान
बाल-कहानियों व कविताओं का पिटारा
शनिवार, 1 दिसंबर 2018
याद है नानी की वह नाराजी .
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मुझे याद नहीं कि मैं नानी के पास कब आई . मैंने सुना था कि मेरे छोटे भाई ने बहुत जल्दी आकर मुझे माँ की गोद से खोह दे दी थी . तब मेरा ठ...
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गुरुवार, 23 अगस्त 2018
बादल बरसे रे ...
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उमड - घमड , घिर आये बादल , रिमझिम बरसे रे .. । चप्पा - चप्पा भीगा , पत्ता - पत्ता हरसे रे ... । कल ही बोली थीं अम्मा --- “...
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गुरुवार, 1 मार्च 2018
खेलो ऐसी होली
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रंग-उमंग गुलाल प्रेम का , भरलो अपनी झोली । खेलो ऐसी होली . भरो भरोसे के गहरे रंग , अपने निश्छल मन में । दुश्मन को भी आज डुबा...
सोमवार, 3 जुलाई 2017
बुलबुल रानी
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"सुनो - सुनो ओ बुलबुल रानी नहीं करेंगे हम शैतानी । जरा हमें घोंसला दिखादो, समझो नहीं इसे मनमानी।" "बोलो कहाँ - ...
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बुधवार, 4 जनवरी 2017
झरना
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झर् झर् झर् झरता है झरना . सर् सर् सर् बहता है झरना , पर्वत के अन्तर में पिघली , करुण-कथा कहता है झरना . रात और दिन झरे निरन्तर ...
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रविवार, 13 नवंबर 2016
पीछे-पीछे सब डिब्बों से......
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आठ माह की मान्या नन्ही मान्या घुटनों-घुटनों चलती किलक-किलककर ! उसे पकड़ने दौड़ पड़ा है पीछे सारा घर ! चश्मा रखकर ...
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शनिवार, 29 अक्टूबर 2016
जगमग दीप जले
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गिरी अँधेरे की दीवारें , जगमग दीप जले . झिलमिल झिलमिल सजी कतारें जगमग दीप जले . गया दशहरा जैसे ही , तन मन आई दीवाली . द्वा...
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