विहान

बाल-कहानियों व कविताओं का पिटारा

बुधवार, 26 जून 2019

बादल बदलो ना ..

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बादल भैया बदले तुम कबसे देख रहे हैं हम । कभी - कभी तो आते हो नखरे बीस दिखाते हो । पानी भी लाते हो कम ।। बादल भैया बदले तुम ...
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गुरुवार, 13 जून 2019

कजरी

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मोहन अपनी गायों को लेकर जंगल में पहुँचा ही था कि पश्चिम की ओर से आसमान में घने बादल उठते दिखे और कुछ ही देर में तेज बारिश शुरु होगई . म...
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शनिवार, 1 दिसंबर 2018

याद है नानी की वह नाराजी .

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मुझे याद नहीं कि मैं नानी के पास कब आई . मैंने सुना था कि मेरे छोटे भाई ने बहुत जल्दी आकर मुझे माँ की गोद से खोह दे दी थी . तब मेरा ठ...
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गुरुवार, 23 अगस्त 2018

बादल बरसे रे ...

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उमड - घमड , घिर आये बादल , रिमझिम बरसे रे .. । चप्पा - चप्पा भीगा , पत्ता - पत्ता हरसे रे ... । कल ही बोली थीं अम्मा --- “...
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गुरुवार, 1 मार्च 2018

खेलो ऐसी होली

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रंग-उमंग गुलाल प्रेम का , भरलो अपनी झोली । खेलो ऐसी होली . भरो भरोसे के गहरे रंग , अपने निश्छल मन में । दुश्मन को भी आज डुबा...
सोमवार, 3 जुलाई 2017

बुलबुल रानी

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"सुनो - सुनो ओ बुलबुल रानी नहीं करेंगे हम शैतानी । जरा हमें घोंसला दिखादो, समझो नहीं इसे मनमानी।" "बोलो कहाँ - ...
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बुधवार, 4 जनवरी 2017

झरना

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झर् झर् झर् झरता है झरना . सर् सर् सर् बहता है झरना , पर्वत के अन्तर में पिघली , करुण-कथा कहता है झरना . रात और दिन झरे निरन्तर ...
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मेरे बारे में

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गिरिजा कुलश्रेष्ठ
जीवन के छह दशक पार करने के बाद भी खुद को पहली कक्षा में पाती हूँ ।अनुभूतियों को आज तक सही अभिव्यक्ति न मिल पाने की व्यग्रता है । दिमाग की बजाय दिल से सोचने व करने की आदत के कारण प्रायः हाशिये पर ही रहती आई हूँ ।फिर भी अपनी सार्थकता की तलाश जारी है ।
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