विहान

बाल-कहानियों व कविताओं का पिटारा

मंगलवार, 5 मई 2020

सबसे सुन्दर

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एक छोटी सी नदी के किनारे एक बड़ा सा बगीचा फैला हुआ था .बगीचे में कई तरह के पेड़ थे .आम , कटहल , अमरूद , सन्तरा , कचनार , गुलमोहर , चम्पक ...
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गुरुवार, 14 नवंबर 2019

तनु को रोना क्यों आगया ?

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“ तनू ! ए तनू !” ----उर्वशी बाहर खडी अपनी चार साल की बेटी तनु के बाहर निकलने का इन्तजार करती पुकार रही थी । और तनु माँ की हर आवाज पर ...
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शुक्रवार, 1 नवंबर 2019

अपना मध्यप्रदेश

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भारत माँ का ह्रदय - प्रदेश अपना मध्य प्रदेश । गौरवमय देता सन्देश अपना मध्यप्रदेश । विन्ध्य ,  सतपुडा  , शिखर यहाँ हरियाली ह...
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बुधवार, 26 जून 2019

बादल बदलो ना ..

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बादल भैया बदले तुम कबसे देख रहे हैं हम । कभी - कभी तो आते हो नखरे बीस दिखाते हो । पानी भी लाते हो कम ।। बादल भैया बदले तुम ...
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गुरुवार, 13 जून 2019

कजरी

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मोहन अपनी गायों को लेकर जंगल में पहुँचा ही था कि पश्चिम की ओर से आसमान में घने बादल उठते दिखे और कुछ ही देर में तेज बारिश शुरु होगई . म...
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शनिवार, 1 दिसंबर 2018

याद है नानी की वह नाराजी .

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मुझे याद नहीं कि मैं नानी के पास कब आई . मैंने सुना था कि मेरे छोटे भाई ने बहुत जल्दी आकर मुझे माँ की गोद से खोह दे दी थी . तब मेरा ठ...
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गिरिजा कुलश्रेष्ठ
जीवन के छह दशक पार करने के बाद भी खुद को पहली कक्षा में पाती हूँ ।अनुभूतियों को आज तक सही अभिव्यक्ति न मिल पाने की व्यग्रता है । दिमाग की बजाय दिल से सोचने व करने की आदत के कारण प्रायः हाशिये पर ही रहती आई हूँ ।फिर भी अपनी सार्थकता की तलाश जारी है ।
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