विहान

बाल-कहानियों व कविताओं का पिटारा

शुक्रवार, 7 अगस्त 2020

चौमासे के दिन

›
  बौछारों से गीले गीले ,चौमासे के दिन  कपड़े जैसे सीले सीले ,चौमासे  के दिन . कभी बादलों की छाया में , सोए सोए से , कभी धूप में चटकीले हैं ,...
4 टिप्‍पणियां:
सोमवार, 6 जुलाई 2020

बिन्नी की जीत

›
नौ साल की बिन्नी अपने तीन भाई-बहिनों में सबसे बड़ी है . पढ़ने में तो सबसे होशियार है ही पर खेलने में भी उसका कोई मुकाबला नही है .उसे सु...
6 टिप्‍पणियां:
रविवार, 28 जून 2020

छोटी चिड़िया

›
उस समय पूरब के आसमान में लालिमा फैल गई थी . चिड़ियाँ भी  अपने अपने नीड़ छोड़कर दाने की तलाश में उड़ गईँ थीं . बिरज माँ घर-आँगन बुहार चुकी...
मंगलवार, 5 मई 2020

सबसे सुन्दर

›
एक छोटी सी नदी के किनारे एक बड़ा सा बगीचा फैला हुआ था .बगीचे में कई तरह के पेड़ थे .आम , कटहल , अमरूद , सन्तरा , कचनार , गुलमोहर , चम्पक ...
1 टिप्पणी:
गुरुवार, 14 नवंबर 2019

तनु को रोना क्यों आगया ?

›
“ तनू ! ए तनू !” ----उर्वशी बाहर खडी अपनी चार साल की बेटी तनु के बाहर निकलने का इन्तजार करती पुकार रही थी । और तनु माँ की हर आवाज पर ...
4 टिप्‍पणियां:
शुक्रवार, 1 नवंबर 2019

अपना मध्यप्रदेश

›
भारत माँ का ह्रदय - प्रदेश अपना मध्य प्रदेश । गौरवमय देता सन्देश अपना मध्यप्रदेश । विन्ध्य ,  सतपुडा  , शिखर यहाँ हरियाली ह...
4 टिप्‍पणियां:
बुधवार, 26 जून 2019

बादल बदलो ना ..

›
बादल भैया बदले तुम कबसे देख रहे हैं हम । कभी - कभी तो आते हो नखरे बीस दिखाते हो । पानी भी लाते हो कम ।। बादल भैया बदले तुम ...
6 टिप्‍पणियां:
‹
›
मुख्यपृष्ठ
वेब वर्शन देखें

मेरे बारे में

मेरी फ़ोटो
गिरिजा कुलश्रेष्ठ
जीवन के छह दशक पार करने के बाद भी खुद को पहली कक्षा में पाती हूँ ।अनुभूतियों को आज तक सही अभिव्यक्ति न मिल पाने की व्यग्रता है । दिमाग की बजाय दिल से सोचने व करने की आदत के कारण प्रायः हाशिये पर ही रहती आई हूँ ।फिर भी अपनी सार्थकता की तलाश जारी है ।
मेरा पूरा प्रोफ़ाइल देखें
Blogger द्वारा संचालित.