विहान
बाल-कहानियों व कविताओं का पिटारा
शनिवार, 23 अक्टूबर 2021
रद्दी सामान
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दीपावली पर विशेष वरुण भैया ने आँगन में बिखरे सामान को ऐसे देखा जैसे कोई मरे हुए जानवर को देखता है । फिर उससे ही जल्दी छुटकारा पाने की आतुर...
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सोमवार, 2 अगस्त 2021
सतरंगी और फूल
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एक थी सतरंगी . वह रंग-बिरंगे पंखों वाली एक सुन्दर तितली थी .वह केवल सुन्दर ही नहीं थी , बड़ी चचंल और मनमौजी भी थी .उसने जैसे ही उड़ना सीखा...
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शनिवार, 19 जून 2021
मेरे बाबूजी
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सरल साँवले दुबले-पतले मेरे बाबूजी . भट्टी में तपकर निकले थे मेरे बाबूजी . नियमों के पक्के बाबूजी बातों के सच्चे थे . निर्मम था अनुशसन , प...
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बुधवार, 16 जून 2021
छुटकू की उड़ान
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बुलबुल हैरान थी . उसके तीन बच्चों में से दो बच्चे बड़े शौक से जल्दी उड़ना सीख गए थे . एक बच्चा तो ,जो तीनों में सबसे ज्यादा तन्दुस्त और चु...
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रविवार, 30 मई 2021
यों लगती है प्यास
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गर्मी रानी , क्यों लगती है , तुमको इतनी प्यास ? पी जाती हो गटक् गटागट , दिन भर कई गिलास । मटके रीते , रीत चले हैं , कूप , न...
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रविवार, 18 अप्रैल 2021
एक अनौखी माँग
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विहान अपने माता पिता की इकलौती सन्तान है . पिता विनीत बैंगलोर में एक बड़ी कम्पनी में मैनेजर हैं और माँ नीलिमा एक पत्रिका में सम्पादक है .उनक...
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गुरुवार, 18 फ़रवरी 2021
आया वसन्त
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सर्दी का अन्त हुआ ,आया वसन्त . लम्बे अब दिन हुए .उजले हैं अनछुए . धूप नई निखरी है .पात पात बिखरी है . उत्सव दिगन्त हुआ आया वसन्त. ...
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