विहान

बाल-कहानियों व कविताओं का पिटारा

सोमवार, 27 दिसंबर 2021

एक पतंग के कारण

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सूरज मन में पतंगों की जितनी रंगीन और मीठी कल्पनाएं संजोये रहता था , उसके पिता उतनी ही कड़वाहट के साथ पतंग उड़ाने वाले लड़कों की आलोचना किया ...
शनिवार, 23 अक्टूबर 2021

रद्दी सामान

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  दीपावली पर विशेष वरुण भैया ने आँगन में बिखरे सामान को ऐसे देखा जैसे कोई मरे हुए जानवर को देखता है । फिर उससे ही जल्दी छुटकारा पाने की आतुर...
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सोमवार, 2 अगस्त 2021

सतरंगी और फूल

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एक थी सतरंगी . वह रंग-बिरंगे पंखों वाली एक सुन्दर तितली थी .वह केवल सुन्दर ही नहीं थी , बड़ी चचंल और मनमौजी भी थी .उसने जैसे ही उड़ना सीखा...
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शनिवार, 19 जून 2021

मेरे बाबूजी

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सरल साँवले दुबले-पतले मेरे बाबूजी . भट्टी में तपकर निकले थे मेरे बाबूजी . नियमों के पक्के बाबूजी  बातों के सच्चे थे .  निर्मम था अनुशसन  , प...
10 टिप्‍पणियां:
बुधवार, 16 जून 2021

छुटकू की उड़ान

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  बुलबुल हैरान थी . उसके तीन बच्चों में से दो बच्चे बड़े शौक से जल्दी उड़ना सीख गए थे . एक बच्चा तो ,जो तीनों में सबसे ज्यादा तन्दुस्त और चु...
11 टिप्‍पणियां:
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गिरिजा कुलश्रेष्ठ
जीवन के छह दशक पार करने के बाद भी खुद को पहली कक्षा में पाती हूँ ।अनुभूतियों को आज तक सही अभिव्यक्ति न मिल पाने की व्यग्रता है । दिमाग की बजाय दिल से सोचने व करने की आदत के कारण प्रायः हाशिये पर ही रहती आई हूँ ।फिर भी अपनी सार्थकता की तलाश जारी है ।
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