विहान

बाल-कहानियों व कविताओं का पिटारा

बुधवार, 7 दिसंबर 2022

तू मेरे जीवन में

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(ईशान के लिये ) 8.12.2022  जैसे पूनम चाँद गगन में तू मेरे जीवन में . जैसे फुलवारी उपवन में . तू मेरे जीवन में . रूप रुपहले पंख पसारे...
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सोमवार, 22 अगस्त 2022

बताओ वह कौन

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(1990 में लिखी गई एक बाल कविता)  दे दी सूरज को छुट्टी  . तो धूप ने करली कुट्टी . पीला सा ह ुआ उजाला , गुम उसकी सिट्टी - पिट्टी . हु...
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बुधवार, 3 अगस्त 2022

आती रोज गिलहरी

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  आती जैसे धूप सुनहरी , आती रोज गिलहरी । करने शैतानी , मनमानी , बिल्कुल जानी मानी । आँखें चंचल कोमल ऊपर खिंची लकीरें गहरी , आती...
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सोमवार, 11 अप्रैल 2022

करूँ मैं क्या ?

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  पूसी पहुँची पटना जबसे , अपने पूरे घर में तबसे , है चुहियों का राज , करूँ अब क्या ?   पहले - पहल एक ही आई . एक और फिर पडी दिखा...
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रविवार, 6 मार्च 2022

सबसे प्यारा घर

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  एक था गौरा और एक थी गौरैया । खूब आसमान की सैर करते और साथ साथ दाना-दुनका चुगते । कुछ समय बाद पहली बार गौरैया के अण्डे देने का अवसर आया .गौ...
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सोमवार, 27 दिसंबर 2021

एक पतंग के कारण

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सूरज मन में पतंगों की जितनी रंगीन और मीठी कल्पनाएं संजोये रहता था , उसके पिता उतनी ही कड़वाहट के साथ पतंग उड़ाने वाले लड़कों की आलोचना किया ...
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मेरे बारे में

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गिरिजा कुलश्रेष्ठ
जीवन के छह दशक पार करने के बाद भी खुद को पहली कक्षा में पाती हूँ ।अनुभूतियों को आज तक सही अभिव्यक्ति न मिल पाने की व्यग्रता है । दिमाग की बजाय दिल से सोचने व करने की आदत के कारण प्रायः हाशिये पर ही रहती आई हूँ ।फिर भी अपनी सार्थकता की तलाश जारी है ।
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