विहान
बाल-कहानियों व कविताओं का पिटारा
रविवार, 27 अप्रैल 2014
मच्छर जी !
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सुनो-सुनो ओ मच्छर जी ! हो तुम कितने निष्ठुर जी ! बातों-बातों में ही तुमने मारे डंक बहत्तर जी । नन्हे नाजुक लगते हो, पर दिल के पूरे पत...
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शुक्रवार, 11 अप्रैल 2014
रात-रात में ही !!
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कल तक थीं टहनी पर , कलियाँ जोई-मोई सी । अभी-अभी जन्मे शिशु जैसी सोई--सोई सी । लेकिन देखा सुबह सभी मिल , पलक खोल हँसतीं थीं खिल-...
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रविवार, 16 मार्च 2014
होली, होली, होली ।
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सुबह -शाम सिन्दूरी हो लीं । होली, होली, होली । आँगन धूप झाँक कर बोली , होली, होली, होली ..। खुलीं ,खिलीं कचनारी कलियाँ। चीं चीं......
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गुरुवार, 13 फ़रवरी 2014
पापा तुम बस मेरे ही हो ...।
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सहमे से बोले अप्पू जी "पाप जरा बताओ । क्या तुम दादी के बेटे हो ? साफ-साफ समझाओ ।" "हाँ..हाँ वह मेरी माँ हैं-"- कह...
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सोमवार, 30 दिसंबर 2013
नई सुबह
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नीम की सबसे ऊँची टहनी पर किट्टू ने देखा । अभी तो चारों तरफ अँधेरा था ।आसमान में थरथराते हुए से तारे और धुन्ध में डूबे हुए पेड-पौधे अभी रात ...
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गुरुवार, 28 नवंबर 2013
जाडे आए भैया ।
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सहमे -सिकुडे लगते हैं दिन , रातें बडी लडैया ... जाडे आये भैया । खीच-खीच सूरज की चादर, रजनी पाँव पसारे । काना फूँसी करें उघारे , थर्...
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बुधवार, 16 अक्टूबर 2013
एक रूप रुपहला तारा
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एक रूप रुपहला तारा जैसे थाली भर पारा या परी भुलक्कड भूली अपना सिंगार पिटारा एक झिलमिल सा आईना टीका है जडा नगीना नीले सरुवर में ...
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