विहान
बाल-कहानियों व कविताओं का पिटारा
शुक्रवार, 16 जून 2023
सूरज का कोई अपना है .
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मई-जून है , भैया सँभलो , किसी तरह तो बचकर निकलो . अनचाहे ही आया है जो , वह गुस्सैला है . धूल–पसीना से लगता मैला-मैला है. लू और...
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शनिवार, 18 फ़रवरी 2023
आशुतोष इसलिये कहाते
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“ जिनके भाल चन्द्रमा साजे . गंगा मैया जटा विराजे . कंठ सजी सर्पों की माला . ऐसा जिनका रूप निराला . भोले - शंकर उन...
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बुधवार, 8 फ़रवरी 2023
सूरज उतरा नदी किनारे
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रूप रुपहले पंख पसारे सूरज उतरा नदी किनारे . बिखरे शंख सीपियाँ चुनने धूप का झोला बगल दबा रे. हवा उतर आई पेड़ों से सर सर सर सर ग...
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बुधवार, 7 दिसंबर 2022
तू मेरे जीवन में
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(ईशान के लिये ) 8.12.2022 जैसे पूनम चाँद गगन में तू मेरे जीवन में . जैसे फुलवारी उपवन में . तू मेरे जीवन में . रूप रुपहले पंख पसारे...
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सोमवार, 22 अगस्त 2022
बताओ वह कौन
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(1990 में लिखी गई एक बाल कविता) दे दी सूरज को छुट्टी . तो धूप ने करली कुट्टी . पीला सा ह ुआ उजाला , गुम उसकी सिट्टी - पिट्टी . हु...
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बुधवार, 3 अगस्त 2022
आती रोज गिलहरी
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आती जैसे धूप सुनहरी , आती रोज गिलहरी । करने शैतानी , मनमानी , बिल्कुल जानी मानी । आँखें चंचल कोमल ऊपर खिंची लकीरें गहरी , आती...
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सोमवार, 11 अप्रैल 2022
करूँ मैं क्या ?
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पूसी पहुँची पटना जबसे , अपने पूरे घर में तबसे , है चुहियों का राज , करूँ अब क्या ? पहले - पहल एक ही आई . एक और फिर पडी दिखा...
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