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शुक्रवार, 16 जनवरी 2026

गुलाब



टहनी टहनी मुस्काते हैं

कितने लाल गुलाब ।

पढकर आए है सूरज से ,

रंगों सजी किताब।

 

कल तक पंखुडियाँ सोईं थीं

देख रही थी सपने ।

तड़के ही चिड़ियों ने इनको ,

गीत सुनाए कितने ।

किरणें बोली --जागो जी,

कबतक देखोगी ख्वाब ।

 

झुकी बोझ से इनके

टहनी की है हालत खस्ता ।

मुन्नू जी ने लाद लिया हो

जैसे भारी बस्ता ।

या नन्ही के कन्धों पर ज्यों

मुन्नू चढ़े जनाब ।......

 

एक फूल से ही लगता जब

कितना सुन्दर आँगन ।

अनगिन फूल खिलें जिस आँगन

है कितना मन-भावन ।

किसने दीं हैं कुदरत को ये ,

खुशियाँ बिना हिसाब ।...

 

रोना धोना छोड़ सभी ,

क्यूँ ना यूँ ही मुस्कायें

फूलों की ही तरह सभी की

आँखों को हम भायें ।

हर सवाल को मिल जाए

ऐसा मासूम जबाब ।

सोमवार, 5 जनवरी 2026

चिरैया जैसी धूप


निकल घोंसले से सूरज के ,

चुगने आई दाने- दुनके।

लगी चहकने डाली-डाली ,

गौरैया सी धूप ।

 

रात गुजारी जैसे-तैसे ,

करके पहरेदारी ।

सर्दी सोयी है अब जाकर ,

ठिठुरी थकी बेचारी ।

बिछी हुई आँगन में ,

नरम बिछैया जैसी धूप .

 

मौसम के मेले में ,

छाये ज्यों खजूर और पिस्ता ।

धूप हुई है भुनी मूँगफली ,

गजक करारी खस्ता ।

सूरज के बटुआ से गिरी ,

रुपैया जैसी धूप ।

 

किलक दूधिया दाँत दिखाती ,

है गुडिया सी धूप ।

खट्टी-मीठी चटपट चूरन की ,

पुडिया सी धूप ।

दूर तलैया की लहरों पर ,

है नैया सी धूप ।

 

अपने गबरू को दुलारती  ,

गैया जैसी धूप ।

दूध पिलाती ,लोरी गाती ,

मैया जैसी धूप ।

दबे पाँव आँगन में चले ,

बिलैया जैसी धूप ।

फुदक रही है डाली-डाली ,

गौरैया सी धूप ।