गुरुवार, 30 मई 2013

सूरज सर

सूरज सर के गरम मिज़ाज
जब देखो रहते नाराज 
 क्यों रहते हैं तेवर तीखे ?
क्यों इतने रूखे अन्दाज ?

देते कितने कठिन सवाल

चलते अन्धड और बवाल
बोलें तो--लू सी चलती है 
डरे-डरे से सब बेहाल
किरणों की ये छडी ??...बाप....रे
होगी बहुत पिटाई आज ।
सूरज सर के गरम मिज़ाज

मैं स्कूल नही जाऊँगी -----

झुरमुट से झाँके गौरैया 
गमले में जा छुपी गिलहरी
बिल में छुप गई चिंकी चुहिया ।
अमराई में चुप्पी साधे ,
मोर पपीहा बुलबुल बाज .
सूरज सर के गरम मिजाज .

बेर--बबूल खडे मुर्गा से 

पीपल को आगया पसीना ।
सिट्टी-पिट्टी गुम गुलाब की
गेंदा भी तो गुमसुम है ना ।
रटा सबक भूली सेवन्ती 
बारहमासी भी बेताज ।
सूरज सर के गरम मिज़ाज ।

नदी--ताल की गिनती गडबड

पोखर के हैं हाल खराब
माथापच्ची करी रात भर 
फिर भी बैठा नही हिसाब।
झरना भैया,की भी देखो
बन्द होगई है आवाज ।
सूरज सर के गरम मिज़ाज ।

2 टिप्‍पणियां:

  1. girija ji meri beti jo abhi 2 saal ki bhi nahi hai...yahi kehti hai chachu gam(garam)hai...chachu gam hai...aapki kavita padhkar bas aisa hi kuch yaad aa gaya...bahut acchi likhi hai aapne!!

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