बुधवार, 14 अगस्त 2013

हमारा तिरंगा

हमें जान से भी है प्यारा तिरंगा,
अनौखा निराला है न्यारा तिरंगा ।

ये लहराए, पहली किरण मुस्कराए

सिन्दूरी प्रभा से गगन जगमगाए।
उदय होते रवि का नजारा तिरंगा,
अनौखा निराला.......

बीच का श्वेत-रंग है हिमालय का गौरव,

गूँजता है अमन के कपोतों का कलरव।
विमल सादगी का सितारा तिरंगा,
अनौखा निराला.........

हरित बाग-वन की छटा लहलहाती,

कि नीचे हरी  क्यारियाँ मुस्कराती,
हरियाली खुशहाली का नारा तिरंगा।
अनौखा निराला.........

चक्र है बीच में जैसे आँखों की पुतली।

अखिल विश्व को दे रहा द्रष्टि उजली।
डूबती आस्थाओं का किनारा तिरंगा।।
अनौखा निराला.......

आन है मान है अपना सम्मान है।

गीत बलिदान का देश की शान है ।
एक अभिमान अपना सहारा तिरंगा।
अनौखा निराला.......

कभी शान हम इसकी गिरने न देंगे।

कभी शीश हम इसका  झुकने न देंगे।
ऊँचा है और रहेगा हमारा तिरंगा ।
हमें जान से भी है प्यारा तिरंगा ।

सभी पाठकों को स्वाधीनता-दिवस मुबारक 

5 टिप्‍पणियां:

  1. तिरंगे ' पर अच्छी कविताएँ कम ही पढने को मिलती हैं. आप का लिखा यह अच्छा गीत आज पढने को मिला.
    आभार.

    उत्तर देंहटाएं
  2. हमें जान से प्यार तिरंगा
    बहुत सुन्दर, राष्ट्रप्रेम से ओत-प्रोत

    उत्तर देंहटाएं